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शिक्षा

 पंडितजी ने छ: वर्ष की आयु से शिक्षा प्राप्त करना प्रारम्भ कर दिया था| उसी अवधि में उन्हें पौरोहित्य-विद्या को भी आत्मसात कर लिया था| इसके पश्चात उन्होंने संस्कृत टोल से प्रथमाऔर मध्यमापरीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं| काशी तथा नवद्वीप जाकर विद्याध्ययन करने में सफल हुए| उन्होंने बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय, काशी के प्राच्य विभाग में अध्ययन किया था| इसके पश्चात नवद्वीप में रह कर उन्होंने न्याय शास्त्र का अध्ययनपूर्ण किया था| राधामोहन जी ने कलकत्ता संस्कृत एसोसिएशनसे न्याय रत्नतर्क तीर्थउपाधियाँ प्राप्त कीं| उन्होंने बंग बिबुध जननी सभाकी न्याय रत्नउपाधि भी प्राप्त की थी|

वृत्ति 

पंडित राधामोहन शर्मा विद्याध्ययन पूर्ण करके सन् 1927 में मणिपुर लौट आए और ब्रह्मपुर संस्कृत टोल तथा थाङमैबन्द संस्कृत टोल में अध्यापन कार्य करने लगे| उ श्री श्री गोविंदजी ब्रह्मसभा का रत्ननियुक्त किया तथाविद्यालंकारउपाधि से अलंकृत किया|  पंडित राधामोहन शर्मा काशी में संस्कृत का अध्ययन करने गए थे, किन्तु वहाँ रहते हुए उन्होंने हिन्दी भाषा पर भी अधिकार कर लिया|  राधामोहन जी काशी में ही गांधी जी से प्रभावित हुए थे; इसीलिए उन्होंने मणिपुर आकर संस्कृत से आजीविका कमाने के बावजूद इस राज्य के लोगों को हिन्दी सिखाने का संकल्प किया|

हिन्दी सेवा

सन् 1930 में भैरोदान हिन्दी स्कूलकी स्थापना के बाद  प्रबंध-समिति के सदस्ययों ने पंडित जी से प्रार्थना की कि स्कूल में हिन्दी पढाने के लिए योग्य अध्यापक नहीं मिल रहा है, अत: वे उनकी सहायता करें और भैरोदान हिन्दी स्कूल में हिन्दी पढाएँ| पंडित राधामोहन शर्मा ने बिना आगा-पीछा सोचे अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और इस स्कूल में हिन्दी अध्यापक का काम करने लगे|  सन् 1940 में मणिपुर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना हुई और पंडितजी इस संस्था के संस्थापक अध्यक्ष रहे | सन् 1953 में मणिपुर हिन्दी परिषद, इम्फालकी स्थापना हुई| वे अट्ठाईस साल तक परीक्षा मंत्री के रूप में इस संस्था का कार्यभार संभालते रहे|

सम्बद्ध संस्थाएँ

 

 

मणिपुर हिंदी परिषद, इम्फाल

 

मणिपुर के प्रथम स्वैच्छिक हिंदी प्रचार संसथान  मणिपुर हिंदी परिषद की स्थापना मैं महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | इस संस्था के स्थापना से 28 वर्षों तक परीक्षा मंत्री का भार अपने कन्धों में लिया| मणिपुर हिंदी परिषद् का जन्म 7 जून सन 1953 ई. को हुआ था | यह संस्था वर्त्तमान समय में पूर्वोत्तर भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत की महत्वपूर्ण हिंदी प्रचार संस्थाओं में से एक बन चूकी है | दिनांक 7-6-1953 ई. को वाहेंबम लैकाई हिंदी स्कूल में आयोजित बैठक  में यह निर्णय लिया गया कि एक स्वैच्छिक हिंदी संस्था की स्थापना की जाये जिस में स्वार्धिकारी संपन्न और जिसके माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं पर अधिक ध्यान देते हुए सरलता के साथ हिंदी प्रचार कार्य आगे बढ़ाया जा सके |

 

मणिपुर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, इम्फाल

मणिपुर राष्ट्रभाषा प्रचार समिति की स्थापना सन 1940 में हुई थी| प्रथमतः: इसका नाम मणिपुर हिंदी प्रचार समिति रखा गया था| कुछ समय के लिए इसका कार्यालय इम्फाल के कैशाम्पत थोकचोम लैकाई में स्थित श्री थोकचोम मधु सिंह सल घर पर रखा गया | इस सभा के संस्थापक पदाधिकारी थे -

क ) पंडित अरिबम राधामोहन शर्मा - अध्यक्ष 

ख) श्री थोकचोम मधु सिंह - मंत्री

ग) श्री थांजम रघुमणि सिंह - कोषाध्यक्ष 

सन 1940 ई. में ही राष्ट्रभाषा परीक्षा केंद्र कांचीपुर से इम्फाल में लाया गया | श्री थोकचोम मधु सिंह जी को इम्फाल केंद्र का व्यवस्थापक नियुक्त किया गया| इसी समय राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा की तरफ से श्री जयेंद्र वर्मा प्रचारक के रूप में इम्फाल आये वर्मा जी की प्रेरणा से इम्फाल के कई स्थानों पर शिक्षण केंद्र खोल दिए गए |

प्राप्त पुरस्कारें

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